• ajit sharma

ग्लोबल वार्मिंग


 


कल एक जन्मदिन की पार्टी में गया था. अब सभी लोग बैठे थे तो ग्लोबल वार्मिंग पे चर्चा निकल पड़ी. सभी को इस विषय पर बड़ी चिंता थी और जानकारी भी. ग्लेशियर पिघल रहे हैं, समुद्र का जल स्तर ऊपर आ रहा है, गर्मी बढ़ रही है इत्यादि सभी विषय निकल पड़े. प्लास्टिक सबसे बड़ी समस्या है, समुन्दर भी प्लास्टिक से भर गया है. शहरों में बाढ़ का एक मुख्या कारण प्लास्टिक है. इन सब पर विस्तृत चर्चा हुई.


अब हमलोग थे विकासवादी और पढ़े लिखे लोग. तो समाधान भी सबके पास था जैसे की प्लास्टिक को सरकार पूरी तरह से बंद कर दे, सरकार हर जगह पेड़ लगाए, सरकार कोयले को आज ही बंद कर दे और सब जगह सोलर प्लांट लगा दे. इन सब सुझावों का सबने एक मत से समर्थन किया की हाँ सरकार को आज ही सब ठीक कर देना चाहिए.


कुछ अविकासवादी और कम पढ़े लिखे सुझाव भी आये. जैसे की, बाजार जाएं तो थैला लेकर जाएं, हर साल एक पेड़ लगायें और उसकी देखभाल करें, घर में एको ब्रिक बनाएं, घर में कम्पोस्टिंग करें इत्यादि. परन्तु चूँकि इसमें सरकार को नहीं खुद को काम करना होगा इसलिए इन सब दकियानूसी विचारों को त्याग दिया गया.

थोड़ी देर बाद केक कटा तो सबने बच्चे को गिफ्ट दिए. सुन्दर सुन्दर चमकीले प्लास्टिक में पैक किये हुए गिफ्ट. फिर सबने प्लास्टिक की प्लेट में केक खाया.


अब थोड़ी देर बाद डिनर शुरू हुआ. सबने अपनी बिसलेरी की पानी की बोतले लीं और थर्माकोल के प्लेट पर खाना शुरू हुआ. खाना पैकेट में आया हुआ था. तो सबने अपनी प्लास्टिक की फ़ूड पैकेट्स के अंदर से खाना लेकर खाना शुरू किया.


खाना खा कर सभी लोग अपने घर चले गए. हाँ एक बात की ख़ुशी सबको थी की आज के एक ज्वलंत विषय ग्लोबल वार्मिंग के ऊपर हमने चर्चा की.

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