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जम्बूद्वीप: जामुन के नाम पर आधारित भारत का प्राचीन नाम






बांगरू-बाण

श्रीपादावधूत की कलम से


ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु: । श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्यैतस्य ब्रह्मणोह्नि द्वितीये परार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे युगे कलियुगे कलिप्रथमचरणे भूर्लोके भारतवर्षे जम्बूद्विपे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गतब्रह्मावर्तस्य ...


इस मंत्र को पढ़कर आपको लग रहा होगा कि मैं कोई धर्म की बात करूंगा क्योंकि हमारे सनातन वैदिक हिंदू धर्म में प्रत्येक धार्मिक कार्य के आरंभ में संकल्प लेने की अवधारणा है।

यजमान स्वयं या ब्राह्मण यजमान से संकल्प करवाता है और इस संकल्प के मंत्र में जंबूद्वीप शब्द का प्रयोग हुआ है तो आज जानते हैं कि इस भारत देश को जंबूद्वीप क्यों कहा गया और इसका और जामुन से क्या संदर्भ या संबंध है..??


प्राचीन काल में भारत को जम्बू द्वीप के नाम से भी जाना जाता था और यह नाम जामुन के वजह से है। आश्चर्य की बात तो यह है कि किसी फल की वजह से किसी देश का नामकरण किया गया हो....!

पौराणिक भूगोल के वर्णन के अनुसार जम्बूद्वीप सप्तमहाद्वीपों में से एक था। यह पृथ्वी के केन्द्र में स्थित माना गया है। और जिसे आज हम एशिया महाद्वीप के नाम से जानते हैं। इसका नामकरण जम्बू (जामुन) नामक वृक्ष के आधार पर हुआ है। इस जम्बू वृक्ष के रसीले फल जिस नदी में गिरते हैं वह मधुवाहिनी जम्बूनदी कहलाती थी। यहीं से जाम्बूनद नामक एक सदानीरा नदी निकलती थी और जिसके रेत में स्वर्ण पाया जाता था। इसके जल और फल के सेवन से रोग-शोक तथा वृद्धावस्था आदि का प्रभाव नहीं होता।

संपूर्ण एशिया खंड में जामुन की बहुतायत रही है । हमारे देश में भी इसके पेड़ों की संख्या लाखों-करोड़ों में थी और संभवत: इसी कारण से यह फल हमारे देश की पहचान बन गया।



भारतीय माइथोलॉजी के दो प्रमुख केंद्र रामायण और महाभारत में भी यह जामुन फल विशेष पात्र रहा है। भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में मुख्य रूप से जामुन का ही सेवन किया था वहीं श्री कृष्ण के शरीर के रंग को ही जामुनी कहा गया है। संस्कृत के श्लोकों में अक्सर इस नाम का उच्चारण आता है।


जैन ग्रंथ 'जंबूद्वीप्प्रज्ञप्ति' में जंबूद्वीप के सात वर्ष कहे गये हैं। हिमालय को महाहिमवंत और चुल्लहिमवंत दो भागों में विभाजित माना गया है और संपूर्ण भारतवर्ष पर आधिपत्य रखने वाले राजा को चक्रवर्ती सम्राट कहा गया था।


जम्बू या जामुन के इतिहास एवं उसके गौरवशाली परंपरा की बात तो हो गई अब चर्चा करते हैं जामुन के फल की जो वर्तमान समय में बहुतायत रूप से उपलब्ध हो रहा है। जामुन विशुद्ध रूप से एक भारतीय फल है।भारत का हर गली - मोहल्ला इसके स्वाद से परीचित हैं। जामुन एक मौसमी फल है। खाने में स्वादिष्ट होने के साथ ही इसके कई औषधीय गुण भी हैं। जामुन अम्लीय प्रकृति का फल है पर यह स्वाद में मीठा होता है। जामुन में भरपूर मात्रा में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज पाया जाता है। जामुन में लगभग वे सभी जरूरी लवण पाए जाते हैं जिनकी शरीर को आवश्यकता होती है।


जामुन खाने के फायदे:

1. पाचन क्रिया के लिए जामुन बहुत फायदेमंद होता है. जामुन खाने से पेट से जुड़ी कई तरह की समस्याएं दूर हो जाती हैं।


2. मधुमेह के रोगियों के लिए जामुन एक रामबाण उपाय है। जामुन के बीज सुखाकर पीस लें। इस पाउडर को खाने से मधुमेह में काफी फायदा होता है।


3. मधुमेह के अलावा इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर से बचाव में कारगर होते हैं। इसके अलावा पथरी की रोकथाम में भी जामुन खाना फायदेमंद होता है। इसके बीज को बारीक पीसकर पानी या दही के साथ लेना चाहिए।


4. अगर किसी को दस्त हो रहे जामुन को सेंधा नमक के साथ खाना फायदेमंद रहता है। खूनी दस्त होने पर भी जामुन के बीज बहुत फायदेमंद साबित होते हैं।


5. दांत और मसूड़ों से जुड़ी कई समस्याओं के समाधान में जामुन विशेषतौर पर फायदेमंद होता है. इसके बीज को पीस लीजिए। इससे मंजन करने से दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।


जामुन में कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, कैल्शियम, आयरन और पोटैशियम होता है। आयुर्वेद में जामुन को भोजन के बाद खाने की सलाह दी जाती है।


जामुन के लकड़ी का भी कोई जबाव नहीं है। एक बेहतरीन इमारती लकड़ी होने के साथ इसके पानी मे टिके रहने की अद्भुत शक्ति है‌। अगर जामुन की मोटी लकड़ी का टुकडा पानी की टंकी में रख दे तो टंकी में शैवाल या हरी काई नहीं जमती सो टंकी को लम्बे समय तक साफ़ नहीं करना पड़ता। प्राचीन समय में जल स्रोतों के किनारे जामुन की बहुतायत होने की यही कारण था इसके पत्तों में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो कि पानी को हमेशा साफ रखते हैं।कुएं के किनारे अक्सर जामुन के पेड़ लगाए जाते थे।


जामुन की एक विशेषता यह है कि इसकी लकड़ी पानी में काफी समय तक सड़ती नही है। जामुन के इसी गुण के कारण इसका प्रयोग नाव बनाने के लिए होता रहा है।


नदियों और नहरों के किनारे मिट्टी के क्षरण को रोकने के लिए जामुन का पेड़ काफी उपयोगी है। अभी तक व्यवसायिक तौर पर योजनाबद्ध तरीके से जामुन की खेती बहुत कम देखने को मिलती हैं।


जामुन की खेती में लाभ की असीमित संभावनाएं हैं।इसका प्रयोग दवाओं को तैयार करने में किया जाता है, साथ ही जामुन से जेली, मुरब्बा जैसी खाद्य सामग्री तैयार की जाती है।


जामुन हम भारतीयों की पहचान रही है अतः इस वृक्ष के संरक्षण और संवर्धन में अपना योगदान देना चाहिए।

इस वर्ष जब आप हरियाली अमावस्या के उपलक्ष में या किसी अन्य प्रयोजन के उपलक्ष में वृक्षारोपण करें तो उसमें निश्चित रूप से जामुन के पौधों का समावेश अवश्य हो।


अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त।

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